योग के संदर्भ मे गुरु शिष्य परंपरा एवं महत्व

Authors

  • निगम देवी Author
  • हेमन्त कुमार कोरी Author
  • परमेश्वरप्पा एस. ब्याडगी Author
  • सुनन्दा आर. पेढेकर Author

Keywords:

योग , गुरु शिष्य परंपरा

Abstract

'बिना व्यवधान के शृंखला रूप में जारी रहना' ही परंपरा कहलाता है । परम्परा-प्रणाली में किसी विषय या उपविषय का ज्ञान बिना किसी परिवर्तन के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ियों में संचारित होता रहता है। इसी का एक पहलु है गुरु शिष्य परंपरा । गुरु शब्द दो अक्षर से मिलकर बना है गु' शब्द का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और 'रु' शब्द का अर्थ है प्रकाश ज्ञान। अज्ञान को नष्ट करने वाला जो ब्रह्म रूप प्रकाश है, वह गुरु है। शिष्य एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है "विद्यार्थी" या "शिक्षार्थी"। शिष्य वह व्यक्ति होता है जो किसी गुरु या शिक्षक से ज्ञान, शिक्षा या दीक्षा प्राप्त करने के लिए उनके मार्गदर्शन में रहता है। भारतीय ज्ञान प्रणाली भारत की प्राचीन और समृद्ध बौद्धिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें दर्शन, विज्ञान, गणित, चिकित्सा, कला, खगोलशास्त्र, साहित्य और शासन जैसी विविध विधाओं का समावेश है एवं यह ज्ञान प्रणाली वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों पर आधारित है भारतीय ज्ञान प्रणाली का मुख्य उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्ति नहीं, बल्कि व्यक्ति के सर्वांगीण विकास और मानवता के कल्याण की दिशा में कार्य करना है। यह प्रणाली सत्य, अहिंसा, धर्म और प्रकृति के साथ सामंजस्य जैसे मूल्यों पर आधारित है। गुरु–शिष्य परंपरा भारतीय ज्ञान प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है , जो भारतीय शिक्षा प्रणाली की आत्मा मानी जाती है। इस परंपरा में गुरु केवल शिक्षक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक और जीवन–दृष्टा होते हैं, जो शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। योग विद्या अत्यंत प्राचीन है योग के प्राचीन ग्रंथों में गुरु शिष्य परंपरा का स्वरूप दिखाई पड़ता है जैसे शिव-पार्वती संवाद,  ऋषि वशिष्ठ-श्रीराम संवाद, महर्षि घेरण्ड – राजा चंडकापाली संवाद, यमराज-नचिकेता संवाद, आदि क्रमशः शिव संहिता, योग वशिष्ठ, घेरण्ड संहिता, कठोपनिषद में वर्णित है।

Author Biographies

  • निगम देवी

    शोधार्थी, विकृति विज्ञान विभाग, आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी (उ. प्र.)

  • हेमन्त कुमार कोरी

    शोधार्थी, कायचिकित्सा विभाग, आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी (उ. प्र.) 

  • परमेश्वरप्पा एस. ब्याडगी

    प्रोफेसर, विकृति विज्ञान विभाग, आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी (उ. प्र.) 

  • सुनन्दा आर. पेढेकर

    प्रोफेसर, कायचिकित्सा विभाग, आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी (उ. प्र.) 

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Published

2025-11-20

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Section

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How to Cite

योग के संदर्भ मे गुरु शिष्य परंपरा एवं महत्व. (2025). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 62-71. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/8

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