सिंगफो लोक कथाओं का सामाजिक महत्व
Keywords:
सिंगफो लोक कथाएँ, संस्कृति, सिंगफो समाज, सभ्यता, पूंङAbstract
अरुणाचल प्रदेश भारत के उत्तर पूर्व में बसा वह राज्य है जहाँ सूरज की किरणें सबसे पहले अपना बसेरा डालती है। अरुणाचल प्रदेश एक जनजाति प्रधान राज्य है। इसमें लगभग 26 प्रमुख जनजातियाँ हैं तथा 100 से अधिक उपजनजातियाँ हैं। सिंगफो जनजाति यहाँ की एक प्रमुख जनजाति है जो चांगलांग और नामसाई जिले में निवास करती हैं। सिंगफो केवल अरुणाचल प्रदेश तक ही सिमित नहीं है बल्कि असम के तिनसुकिया जिला में मारघेरिता, शिवसागर और जोरहाट आदि क्षेत्रों में भी निवास करते हैं। अरुणाचल प्रदेश में सिंगफो लोग म्याव, बोरदुमसा, दियुन, पियोंग, नामसाई, इम्फुम आदि क्षेत्रों में बसे हुए हैं। सिंगफो समाज में लोक कथाओं का बहुत महत्त्व है। इन कथाओं को ‘पूङ’ कहा जाता है। ये कथाएँ सिंगफो समाज में मिथक, किवदन्ती, लोक-कथा आदि रूपों में उपस्थित है। ये सभी कथाएँ आज भी उनकी जीवन-शैली, पूजा-पद्धति, मान्यता और विभिन्न रीति-रिवाजों के साथ जुड़ी हुई है। सिंगफो समाज में आज भी ये लोक कथाएँ जीवित है।
“लोक कथाएँ लोक में प्रचलित वे कहानियां है जो मनुष्य की कथा प्रवित्ति के साथ चलकर विभिन्न परिवर्तनों एवं परिवर्धनों के साथ वर्तमान रूप में प्राप्त होती हैं।” कथा कहने और सुनने की प्रथा लम्बे समय से चली आ रही है। इन कथाओं के द्वारा ही लोग अपने भावों और विचारों को प्रकट करते हैं। एक प्रकार से देखा जाएँ तो यही मनोरंजन का एकमात्र साधन थी। दिन भर लोग अपने खेतों में काम करते और शाम को एकत्रित होकर इन कथाओं का आनंद लेते। साहित्य समाज का दर्पण होता है और साहित्यकार अपने समाज की गतिविधियों को अपनी लेखनी के द्वारा व्यक्त करता है। उसी प्रकार ये लोक कथाएं भी जनजातीय लोगों की संस्कृति, सभ्यता तथा मान्यताओं को सही रूप में व्यक्त करती हैं।