प्राचीन भारतीय राजनीतिक संस्थाओं की व्याख्या में के.पी. जायसवाल की इतिहास-दृष्टि का विश्लेषण
Keywords:
के.पी. जायसवाल, इतिहास-दृष्टि, प्राचीन भारत, गणराज्य, राजनीतिक संस्थाएँ, हिन्दू पॉलिटी।Abstract
प्राचीन भारतीय राजनीतिक इतिहास के अध्ययन में काशी प्रसाद (के.पी.) जायसवाल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने औपनिवेशिक इतिहासकारों की उस धारणा का खंडन किया कि प्राचीन भारत में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक संस्थाओं का अभाव था। अपनी प्रसिद्ध कृति ‘हिन्दू पॉलिटी’ के माध्यम से उन्होंने वैदिक साहित्य, बौद्ध एवं जैन ग्रंथों, अभिलेखों तथा अन्य ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर यह प्रतिपादित किया कि प्राचीन भारत में सभा, समिति, गण, संघ एवं मंत्रिपरिषद जैसी विकसित राजनीतिक संस्थाएँ विद्यमान थीं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य के.पी. जायसवाल की इतिहास-दृष्टि तथा प्राचीन भारतीय राजनीतिक संस्थाओं संबंधी उनकी व्याख्याओं का विश्लेषण एवं आलोचनात्मक मूल्यांकन करना है। अध्ययन गुणात्मक एवं वर्णनात्मक अनुसंधान पद्धति पर आधारित है तथा द्वितीयक स्रोतों का उपयोग किया गया है। शोध से स्पष्ट होता है कि जायसवाल ने भारतीय राष्ट्रवादी इतिहासलेखन को नई दिशा प्रदान करते हुए भारतीय लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक परंपराओं के ऐतिहासिक आधार को सुदृढ़ करने का प्रयास किया। यद्यपि उनकी कुछ व्याख्याओं की आधुनिक इतिहासकारों द्वारा आलोचना की गई है, फिर भी भारतीय राजनीतिक इतिहास के अध्ययन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और स्थायी है।

