विश्व में कीवी की खेती से अर्थ उपार्जन

Authors

  • Dr. Dineshwar Paswan Author

Keywords:

कीवी उत्पादन, वैश्विक व्यापार, मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन, टिकाऊ कृषि, निर्यात संभावनाएँ

Abstract

कीवी फल (Actinidia deliciosa) आज विश्व की सबसे तेजी से उभरती हुई व्यावसायिक फसलों में से एक है। यह न केवल स्वाद और पोषण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी एक प्रमुख स्थान रखता है। कीवी में उच्च मात्रा में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो इसे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी बनाते हैं। इसकी बढ़ती वैश्विक मांग ने कई देशों को इसे लाभकारी फसल के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

वर्तमान में, चीन, न्यूजीलैंड, इटली, ग्रीस, ईरान और चिली कीवी उत्पादन के प्रमुख देश हैं। FAO (2024) के अनुसार, विश्व का लगभग 60% उत्पादन चीन में होता है, जबकि न्यूजीलैंड और इटली क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। भारत, नेपाल और भूटान जैसे एशियाई देश भी हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहे हैं। कीवी का उत्पादन मुख्यतः ठंडी और समशीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में सफल होता है, जहाँ मिट्टी का pH और नमी संतुलन फसल की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

आर्थिक दृष्टि से, कीवी एक उच्च मूल्य वाली नकदी फसल (High-Value Cash Crop) के रूप में उभरी है। इसके ताजे फलों के साथ-साथ प्रसंस्कृत उत्पाद — जैसे कीवी जूस, जैम, ड्राई कीवी, पाउडर और बेकरी उत्पादों में उपयोग — से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं। मूल्य संवर्धन (Value Addition) के साथ-साथ निर्यात बाजार में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। यूरोप, अमेरिका, जापान और मध्य पूर्व की बाजारों में कीवी की लोकप्रियता ने विकासशील देशों के लिए नई संभावनाएँ खोली हैं।

रोजगार सृजन और सामाजिक प्रभाव के दृष्टिकोण से भी यह फसल अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। खेतों में पौधारोपण, देखभाल, पैकिंग, और विपणन जैसी गतिविधियों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल रही है। कीवी से संबंधित सहायक उद्योग जैसे कोल्ड स्टोरेज, परिवहन, और पैकेजिंग इकाइयों का विकास स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास में योगदान दे रहा है।

हालाँकि, कीवी उत्पादन से जुड़ी कुछ चुनौतियाँ भी हैं — जैसे जलवायु परिवर्तन, कीट-रोग, उच्च प्रारंभिक लागत और बाजार मूल्य अस्थिरता। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, रोग प्रतिरोधी किस्मों का विकास, और आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप इरिगेशन व कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर स्टोरेज (CAS) को अपनाना आवश्यक है।

कुल मिलाकर, कीवी की खेती आर्थिक लाभ, पोषण सुरक्षा, और सतत कृषि विकास का एक सशक्त माध्यम बन रही है। टिकाऊ उत्पादन पद्धतियाँ, मूल्य संवर्धन, और निर्यात उन्मुख दृष्टिकोण के साथ यह फसल आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई दिशा तय कर सकती है।

Author Biography

  • Dr. Dineshwar Paswan

    Assistant Professor, Department of Economics, M.L.S.College, SARISAB-PAHI, MADHUBANI, BIHAR

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Published

2025-11-08

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