छत्तीसगढ़ में वास्तुकला: "बस्तर के विशेष संदर्भ में"
Keywords:
छत्तीसगढ़, वास्तुकला, बस्तरAbstract
छत्तीसगढ़ के आरंभिक काल के संबंध में ना तो साहित्य और ना ही पुराणों से कोई जानकारी मिलती है। केवल पुरातात्विक साक्ष्य है जिसके आधार पर कुछ बातें स्पष्ट होती है। छत्तीसगढ़ का पुरातत्व अत्यंत समृद्धहै। सीता बेंगरा जोगीमारा की गुफा मल्हार लाफ़ागढ़ ताला सिरपुर राजिम रायगढ़ खरौद इत्यादि छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक स्थल है।
बस्तर के विशेष संदर्भ में अगर बात की जाए तो चित्रकूट बारसूर नारायण पाल भोंगा पाल केशकाल धनोरा अड़ेंगा ऐसा पुरातात्विक स्थल है जो छत्तीसगढ़ के इतिहास में कुछ अध्याय जोड़ने हैं।
बस्तर दक्षिणापथ के मुख्य पथ में स्थित था। राम का वन गमन भी इसी क्षेत्र से हुआ था। सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होने के बावजूद भी अशोक के शिलालेख और स्तूप जैसे संचार इस काल से प्राप्त नहीं हुए। किंतु संभावना दूसरी होगी कि कलिंग युद्ध के दौरान अशोक का प्रभाव इस क्षेत्र में पड़ा होगा।

