वैदिक पंचांग और मुहूर्त शास्त्र: एक दार्शनिक एवं वैज्ञानिक विश्लेषण

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

वैदिक पंचांग; मुहूर्त; तिथि; काल-दर्शन; कालचिकित्सा (क्रोनोबायोलॉजी); PRISMA-ScR; ज्योतिष-विज्ञान विमर्श

Abstract

समय का मापन और उसका सामाजिक-धार्मिक उपयोग किसी भी सभ्यता की बौद्धिक परिपक्वता का सूचक है। भारतीय परम्परा में यह उपयोग पंचांग और मुहूर्त-व्यवस्था के रूप में सहस्राब्दियों से जीवित है। प्रस्तुत शोध-पत्र वैदिक पंचांग के पाँचों अंगों तथा अहोरात्र के तीस मुहूर्तों (पन्द्रह दिवा और पन्द्रह रात्रि) का दार्शनिक एवं वैज्ञानिक विश्लेषण करता है। अध्ययन की पद्धति PRISMA-ScR की पारदर्शिता-भावना पर आधारित एक स्कोपिंग समीक्षा है, जिसमें प्रदत्त सन्दर्भ-संग्रह की जाँच तथा शास्त्रीय एवं आधुनिक वैज्ञानिक स्रोतों का उद्देश्यपूर्ण चयन सम्मिलित है। लेखक ने खगोलीय गणना द्वारा मौलिक तुलनात्मक आँकड़े भी तैयार किए हैं। वर्ष 2024 में 372 तिथियों की अवधि 20 घण्टे 12 मिनट से 26 घण्टे 46 मिनट के बीच पाई गई; दिल्ली में 20 जून को दिवा-मुहूर्त लगभग 56.2 मिनट तथा 21 दिसम्बर को लगभग 41.6 मिनट आँका गया, जबकि रूढ़ मान 48 मिनट का है। निष्कर्षतः पंचांग का खगोलीय-गणितीय आधार सुदृढ़ और सत्यापनीय है, जबकि मुहूर्त के शुभाशुभ फलों के लिए प्रत्यक्ष प्रायोगिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं; तथापि कालचेतना, अनुशासन, अनुष्ठानजन्य मनोवैज्ञानिक लाभ और सर्केडियन-सामंजस्य के स्तर पर इस व्यवस्था के कुछ परीक्षण-योग्य पक्ष विद्यमान हैं।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    Dr. Bhim Rao Ambedkar Law University, Jaipur, Rajasthan

     

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Published

2025-12-24

Issue

Section

Articles

How to Cite

वैदिक पंचांग और मुहूर्त शास्त्र: एक दार्शनिक एवं वैज्ञानिक विश्लेषण. (2025). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 93-114. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/204

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