कबीर की आर्थिक सुधारवादी चेतना
Abstract
कबीर कालीन भारतीय समाज को मोटे तौर- पर दो विभागों में बाटा जा सकता है। एक में सुलतान, उमरा उलेया, सामन्त राजा सरकारी से पदाधिकारी, विदेशी मूल के अन्य मुसलमान, सुलतान के कृपापात्र बने हिन्दू जागीरदार आदि की गणना की जा सकती है।
इसको संक्षेप में शासक वर्ग कहा जा सकता है वह वर्ग अत्यन्त सम्पन्न और समृद्धिशाली था। इनका जीवन वैभव और विलासिता से पूर्ण था। बड़े बड़े महलों में अनगिनत भ्रत्यों और दासों से परिसेवित जीवन बिताने वाले इनके पास अपरिमित संपति भरी थी, सोना और चांदी का ढेर बना था। अपनी शान शौकत और आडम्बर का प्रदर्शन करने के लिए ये लोग सम्पति पानी की तरह बहा देते थे।

