आधुनिक जीवनशैली में मुहूर्त की प्रासंगिकता: सकारात्मक ऊर्जा और कार्य सिद्धि का विज्ञान

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

मुहूर्त विज्ञान, पंचांग, सकारात्मक ऊर्जा, कार्य सिद्धि, कालानुक्रमिक जीवविज्ञान, अनुष्ठान मनोविज्ञान, PRISMA, वैदिक कालगणना

Abstract

वैदिक पंचांग में दिन-रात्रि के 24 घंटों को 30 मुहूर्तों (प्रत्येक 48 मिनट) में विभक्त करने की परंपरा भारतीय कालगणना की एक अत्यंत सूक्ष्म एवं व्यवस्थित प्रणाली है। प्रस्तुत शोध-पत्र आधुनिक जीवनशैली में मुहूर्त-विज्ञान की प्रासंगिकता का विश्लेषणात्मक-यथार्थवादी (analytical-reality-exposing) दृष्टिकोण से वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह जाँचना है कि क्या मुहूर्त-आधारित कार्य-नियोजन केवल सांस्कृतिक विश्वास है अथवा इसके पीछे कालानुक्रमिक जीवविज्ञान (chronobiology), मनोविज्ञान तथा सामाजिक संरचना का कोई प्रामाणिक आधार विद्यमान है। PRISMA-प्रेरित व्यवस्थित समीक्षा पद्धति का उपयोग करते हुए लेखक के संस्थागत संदर्भ-भंडार से 117 अभिलेखों की जाँच की गई, जिनमें से कालानुक्रमिक समावेशन मानदंड (2024 अथवा पूर्व) के आधार पर 17 प्रासंगिक अभिलेख तथा पूरक शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक साहित्य से 12 अतिरिक्त स्रोत चयनित किए गए। परिणाम दर्शाते हैं कि मुहूर्त-व्यवस्था एक त्रि-आयामी संरचना है— (क) खगोलीय-गणितीय आयाम, (ख) मनो-सामाजिक आयाम (कृतज्ञता, आत्म-दक्षता, अनुष्ठान-प्रभाव), तथा (ग) जैविक-लयबद्ध आयाम (circadian rhythm) से इसका आंशिक सामंजस्य। चर्चा खंड में इसे अंध-विश्वास एवं वैज्ञानिक यथार्थ दोनों दृष्टियों से उजागर किया गया है, जिसमें पुष्टि-पक्षपात (confirmation bias), बार्नम प्रभाव तथा अनुष्ठान-जनित मनोवैज्ञानिक स्थिरता (ritual-induced psychological stability) जैसी अवधारणाओं की चर्चा सम्मिलित है। निष्कर्षतः, मुहूर्त का "कार्य-सिद्धि" पर प्रभाव अधिकांशतः अप्रत्यक्ष— अनुष्ठानिक आत्मविश्वास, सामूहिक समन्वय एवं सांस्कृतिक सातत्य के माध्यम से— सिद्ध होता प्रतीत होता है, न कि किसी प्रत्यक्ष दैवीय कारणता से। यह शोध-पत्र भावी अनुसंधान हेतु एक अनुभवजन्य ढाँचा प्रस्तावित करता है।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    Dr. Bhim Rao Ambedkar Law University, Rajasthan, India

     

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Published

2025-09-27

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Section

Articles

How to Cite

आधुनिक जीवनशैली में मुहूर्त की प्रासंगिकता: सकारात्मक ऊर्जा और कार्य सिद्धि का विज्ञान. (2025). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 3(3), 19-30. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/197

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