मनोविज्ञान और ज्योतिष का अंतर्संबंध: शुभ मुहूर्तों का मानव निर्णय क्षमता पर प्रभाव

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

मुहूर्त; ज्योतिष; निर्णय क्षमता; संज्ञानात्मक पक्षपात; नियंत्रण का भ्रम; अपेक्षा-प्रभाव; मनोविज्ञान

Abstract

भारतीय समाज में विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार-आरंभ, यात्रा और शल्य-चिकित्सा जैसे निर्णय आज भी शुभ मुहूर्त देखकर लिए जाते हैं। वैदिक पंचांग एक अहोरात्र को तीस मुहूर्तों में बाँटता है, जिनमें पंद्रह दिन के और पंद्रह रात्रि के हैं। इस शोध-पत्र का प्रश्न यह नहीं है कि मुहूर्त खगोलीय या भौतिक रूप से कार्यकारण-सिद्ध हैं या नहीं। प्रश्न यह है कि मुहूर्त-विश्वास मानव निर्णय-प्रक्रिया, चिंता-नियमन, आत्म-प्रभावकारिता और व्यवहारिक परिणामों को मनोवैज्ञानिक स्तर पर कैसे प्रभावित करता है।

पत्र में तीन स्रोत-वर्गों का समेकन किया गया है:

  • शास्त्रीय संस्कृत ग्रंथ।
  • ज्योतिष की वैधता की जाँच करने वाले नियंत्रित अध्ययन।
  • निर्णय-विज्ञान और सामाजिक मनोविज्ञान का साहित्य।

विश्लेषण से तीन निष्कर्ष निकलते हैं:

  • नियंत्रित अध्ययनों में ज्योतिषीय पूर्वानुमानों की पूर्वकथन-वैधता का समर्थन नहीं मिलता।
  • मुहूर्त-विश्वास के मनोवैज्ञानिक प्रभाव, जैसे नियंत्रण-बोध, चिंता-न्यूनता और आत्म-प्रभावकारिता, अन्य अंधविश्वासों और अनुष्ठानों पर हुए प्रयोगों के अनुरूप संभावित हैं।
  • ये प्रभाव दोधारी हैं। वे निर्णय-स्थिरता भी दे सकते हैं और विलंब, भय तथा आलोचनात्मक चिंतन की कमी भी पैदा कर सकते हैं।

पत्र मुहूर्त को एक संरचित निर्णय-अनुष्ठान (structured decision ritual) के रूप में समझने का प्रस्ताव रखता है।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    Jamia Hamdard, New Delhi

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Published

2025-05-22

Issue

Section

Articles

How to Cite

मनोविज्ञान और ज्योतिष का अंतर्संबंध: शुभ मुहूर्तों का मानव निर्णय क्षमता पर प्रभाव. (2025). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 2(11), 25-40. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/191

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