विवाह संस्कार और गृहप्रवेश में मुहूर्त चयन के ज्योतिषीय नियम एवं उनके निहितार्थ

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

मुहूर्त, विवाह संस्कार, गृहप्रवेश, ज्योतिषशास्त्र, अनुष्ठान-मनोविज्ञान, पंचांग, PRISMA-ScR, मुहूर्तचिंतामणि

Abstract

भारतीय समाज में विवाह और गृहप्रवेश केवल पारिवारिक आयोजन नहीं हैं, ये सामाजिक मान्यता, आर्थिक व्यय और धार्मिक आस्था के संगम-बिंदु हैं। इन दोनों अवसरों की तिथि और समय का निर्धारण प्रायः मुहूर्तशास्त्र के नियमों से होता है। यह अध्ययन तीन प्रश्नों का उत्तर खोजता है। पहला, शास्त्रीय स्रोतों में विवाह और गृहप्रवेश के मुहूर्त-नियम क्या हैं और उनमें कितनी आंतरिक एकरूपता या विविधता है। दूसरा, ज्योतिष और संबद्ध विश्वासों की प्रभावकारिता के विषय में उपलब्ध अनुभवजन्य शोध क्या बताता है। तीसरा, इन नियमों के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, विधिक और आर्थिक निहितार्थ क्या हैं।

पद्धति के रूप में PRISMA 2020 और PRISMA-ScR के पारदर्शिता-सिद्धांतों का अनुकूलित उपयोग किया गया है। इसके अंतर्गत 117 प्रविष्टियों के लेखक-संकलित संदर्भ-समुच्चय की क्रमिक छँटाई की गई और उसमें 32 स्वतंत्र प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोत जोड़े गए। कुल 37 स्रोतों का विश्लेषण हुआ।

निष्कर्ष चार हैं। पहला, मुहूर्त-नियम एक बहुस्तरीय परंतु ग्रंथ-भेद, क्षेत्र-भेद और पंचांग-भेद से अनेक स्थानों पर परस्पर भिन्न व्यवस्था हैं। दूसरा, ज्योतिषीय पूर्वकथन की सटीकता के परीक्षणों में सामान्यतः संयोग-स्तर से अधिक प्रमाण नहीं मिला है, और मुहूर्त-विशिष्ट प्रत्यक्ष परीक्षण-साहित्य अत्यल्प है। तीसरा, अनुष्ठान-मनोविज्ञान के शोध बताते हैं कि अनुष्ठानों का वास्तविक लाभ चिंता-शमन, सामाजिक समन्वय और अर्थ-निर्माण में निहित हो सकता है, इसके लिए किसी खगोलीय-कारणत्व की आवश्यकता नहीं। चौथा, भारतीय विधि में विवाह की वैधता मुहूर्त पर निर्भर नहीं है।

यह पत्र परंपरा के खंडन का नहीं, परंपरा के विवेकपूर्ण और प्रमाण-सजग पुनर्पाठ का प्रस्ताव है।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    Dr. Bhim Rao Ambedkar Law University, Jaipur, Rajasthan

     

Downloads

Published

2025-11-25

Issue

Section

Articles

How to Cite

विवाह संस्कार और गृहप्रवेश में मुहूर्त चयन के ज्योतिषीय नियम एवं उनके निहितार्थ. (2025). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 118-133. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/202

Similar Articles

1-10 of 78

You may also start an advanced similarity search for this article.

Most read articles by the same author(s)

1 2 3 4 5 6 7 > >>