दैनिक जीवन में काल चक्र और शुभ-अशुभ मुहूर्तों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

कालचक्र; मुहूर्त; अंधविश्वास का मनोविज्ञान; कालजैविकी; नोसीबो; अनुष्ठान; ज्योतिष का वैज्ञानिक परीक्षण

Abstract

भारतीय जीवन-पद्धति में समय केवल घड़ी की गणना नहीं, बल्कि अर्थ, मर्यादा और नियति से जुड़ा संवर्ग है। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण से बना पंचांग तथा उससे निकले शुभ-अशुभ मुहूर्त विवाह, गृहप्रवेश, यात्रा, व्यापार और चिकित्सा जैसे निर्णयों को आज भी प्रभावित करते हैं। यह शोधपत्र प्रश्न उठाता है कि मुहूर्त-विश्वास का प्रभाव ब्रह्मांडीय है या मनोवैज्ञानिक। इसके लिए कालचक्र की शास्त्रीय अवधारणा, कालजैविकी (क्रोनोबायोलॉजी), अंधविश्वास का संज्ञानात्मक मनोविज्ञान, अनुष्ठान और चिंता-नियमन, नोसीबो प्रभाव तथा ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के नियंत्रित परीक्षणों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है।

समीक्षा के निष्कर्ष तीन हैं। पहला, ज्योतिषीय भविष्यवाणी की वैधता को नियंत्रित परीक्षणों में समर्थन नहीं मिला है। दूसरा, शुभ-अशुभ की मान्यता व्यक्ति के व्यवहार, चिंता, आत्मविश्वास, जनसंख्या-स्तर पर निर्णयों के समय और कुछ स्थितियों में स्वास्थ्य-परिणामों को मापने योग्य रूप से बदलती है। तीसरा, कुछ शास्त्रीय कालनियम, जैसे ब्राह्म-मुहूर्त में जागरण, दैनिक लय-नियमन की दृष्टि से परिकल्पना-योग्य हैं, पर उनके सार्वभौमिक दावे अभी अप्रमाणित हैं। लेखक एक त्रि-स्तरीय काल-अर्थ-निर्माण प्रतिमान (Temporal Meaning-Making Model) प्रस्तावित करता है, जो मुहूर्त के प्रभाव को "ब्रह्मांडीय कारण" की जगह "अर्थ-जनित मनो-सामाजिक कारण" के रूप में समझाता है।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    Jamia Hamdard, New Delhi

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Published

2025-05-22

Issue

Section

Articles

How to Cite

दैनिक जीवन में काल चक्र और शुभ-अशुभ मुहूर्तों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव. (2025). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 2(11), 41-56. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/192

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