चौघड़िया चक्र: वार और ग्रहों के आधार पर यात्रा एवं व्यवसाय के लिए सर्वोत्तम समय का चयन

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

चौघड़िया, मुहूर्त, वार, ग्रह, पंचांग, कालजैविकी, यात्रा-सुरक्षा, व्यवसाय-निर्णय, साक्ष्य-आधारित विश्लेषण

Abstract

पृष्ठभूमि: चौघड़िया भारतीय पंचांग-परंपरा की एक लोकप्रिय दैनिक मुहूर्त-पद्धति है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ खंडों में बाँटकर प्रत्येक खंड को वार-स्वामी ग्रह के क्रम से उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ और रोग नाम दिए जाते हैं। यात्रा-आरंभ, क्रय-विक्रय, अनुबंध और व्यवसाय-उद्घाटन जैसे निर्णयों में इसका व्यापक उपयोग होता है। फिर भी इसके शास्त्रीय स्रोत, संरचनात्मक तर्क और अनुभवजन्य प्रमाण पर सुव्यवस्थित विश्लेषण बहुत कम उपलब्ध है।

उद्देश्य: (क) चौघड़िया की कालगणनात्मक और ग्रह-क्रमिक संरचना का विश्लेषण करना; (ख) कालजैविकी, यात्रा-सुरक्षा, वित्तीय बाज़ार, ज्योतिष-परीक्षण और व्यवहार-मनोविज्ञान के पूर्व-प्रकाशित शोध का तुलनात्मक संश्लेषण करना; (ग) यात्रा एवं व्यवसाय हेतु समय-चयन का साक्ष्य-सम्मत व्यावहारिक ढाँचा प्रस्तुत करना।

पद्धति: PRISMA 2020 और PRISMA-ScR के पारदर्शिता-सिद्धांतों पर आधारित संरचित वर्णनात्मक समीक्षा की गई। इसमें 2024 तक प्रकाशित 62 स्रोत सम्मिलित हैं, जिनमें शास्त्रीय ग्रंथ, ऐतिहासिक-खगोलीय अध्ययन, कालजैविकी, दुर्घटना-विज्ञान, वित्त-अर्थशास्त्र और समाजशास्त्रीय साहित्य आते हैं। इसके साथ चौघड़िया की सारणियों का लेखकीय गणितीय विश्लेषण भी किया गया।

परिणाम: (1) चौघड़िया-चक्र का ग्रह-क्रम होरा-परंपरा के चाल्डियन क्रम से गणितीय रूप से संगत है, परंतु इसका प्रत्यक्ष शास्त्रीय श्लोक-प्रमाण सीमित है। (2) सप्ताह के सात दिनों के दिवा-खंडों में 24 खंड शुभ-वर्ग (अमृत, शुभ, लाभ), 24 खंड अशुभ-वर्ग (उद्वेग, रोग, काल) और 8 खंड चर के हैं। यह संरचनात्मक संतुलन दर्शाता है कि पद्धति में पूर्वनिर्धारित "सदा श्रेष्ठ" दिन नहीं है। (3) मानव-प्रदर्शन में दिन के समय का प्रभाव, विशेषतः मध्यरात्रि-प्रातः और दोपहर-पश्चात की उनींदी अवधि में, सुदृढ़ रूप से प्रमाणित है। (4) किसी भी प्रकाशित अनुभवजन्य अध्ययन ने चौघड़िया-खंडों के ग्रह-नामित वर्गों और यात्रा या व्यवसायिक परिणामों के बीच कार्य-कारण संबंध का सीधा परीक्षण नहीं किया है। (5) ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के नियंत्रित परीक्षणों के परिणाम प्रायः संयोग-स्तर के रहे हैं।

निष्कर्ष: चौघड़िया की उपयोगिता को सांस्कृतिक-मनोवैज्ञानिक समन्वय-उपकरण के रूप में समझना अधिक यथार्थवादी है। यात्रा-सुरक्षा और व्यावसायिक जोखिम-प्रबंधन के लिए इसे कालजैविकी-आधारित साक्ष्यों का स्थान नहीं देना चाहिए। पत्र एक परीक्षण-योग्य परिकल्पना और अध्ययन-अभिकल्प भी प्रस्तावित करता है।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    Dr. Bhim Rao Ambedkar Law University, Jaipur, Rajasthan, India

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Published

2025-07-29

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How to Cite

चौघड़िया चक्र: वार और ग्रहों के आधार पर यात्रा एवं व्यवसाय के लिए सर्वोत्तम समय का चयन. (2025). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 3(1), 29-42. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/214

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