गुरु जम्भेश्वर जी महाराज - एक महान पर्यावरणविद और पारिस्थितिक वैज्ञानिक

Authors

  • डा०  सुमन बाला Author
  • डा० नवीन कुमार Author

Abstract

गुरु जाम्भोजी एक महान पर्यावरण विद और पारिस्थितिक वैज्ञानिक के साथ समाज सुधारक, दार्शनिक, क्रांतिकारी व भक्ति आन्दोलन के प्रणेता थे । उनके सिद्दांत, दार्शनिक मान्यताएं और सामाजिक दृष्टिकोण में एक समन्वय एवं सामंजस्य है । उनके नियम प्रकृति के सिद्दांतों पर आधारित है । जाम्भोजी की शिक्षाओं का आज के वैज्ञानिकों पर भी प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने अहिंसा एवं दया के सिद्धान्त व पर्यावरण के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया । इन्होंने अपनी शब्दवाणी में जीव रक्षा, पर्यावरण रक्षा को प्रमुख सिद्धांत मानकर पर्यावरण की प्रबंधकीय व्यवस्था का विवरण अपनी स्वानुभूतियों के माध्यम से प्रकट किया है । बिश्नोईयों द्वारा धर्म में मुर्दे को गाड़ना, विवाह के समय मुहूर्त नहीं निकालना आदि सिद्धान्त ग्रहण किये हैं। उनकी शिक्षाओं पर वैष्णव सम्प्रदाय, कबीर व नानकपंथ का भी बड़ा प्रभाव है।” वे पर्यावरण के सच्चे साधक, परोपकारी महात्मा तथा अवतारी पुरुष थे । वे पर्यावरण के साथ-साथ सम्पूर्ण मानव जाति, समग्र विश्व और प्राणीमात्र के परम रक्षक थे ।

गुरु जम्भेश्वर जी महाराज मध्यकालीन भक्ति धारा के महान पुरुष थे । इसके साथ -साथ वे महान चिंतक दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, समाज सुधारक, विश्व के महान पर्यावरण विद व लोक चेतक थे । गुरु जम्भेश्वर जी ने 29 नियमों की आचार संहिता का प्रतिपादन किया । उनके ये नियम अत्यंत वैज्ञानिक व व्यावहारिक हैं जो प्राणी मात्र लिये अत्यंत कल्याणकारी व उपयोगी हैं  । गुरु जाम्भोजी ने लोगों को अपना गुरुत्व ज्ञान प्रदान करते हुए पर्यावरण सुरक्षा व प्राणीमात्र की सुरक्षा का संदेश दिया । उन्होने 29 नियमों की आचार संहिता में दो नियम  प्राकृतिक संतुलन हेतु  दिये ।

 

Author Biographies

  • डा०  सुमन बाला

    पूर्व शोधार्थी-गुरु जम्भेश्वर धार्मिक अध्ययन संस्थान, गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रोधोगिकी विश्वविधालय, हिसार (हरि)

     

     
  • डा० नवीन कुमार

    पूर्व शोध-छात्र, शिक्षा विभाग, कुरुक्षेत्र  विश्वविदयालय, कुरुक्षेत्र

     

     

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Published

2023-10-28

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How to Cite

गुरु जम्भेश्वर जी महाराज - एक महान पर्यावरणविद और पारिस्थितिक वैज्ञानिक. (2023). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 1(4), 13-16. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/116