प्रहर और होरा प्रणालियों के आधार पर अल्पकालिक निर्णय लेने में ज्योतिषीय सहायता: एक विश्लेषणात्मक एवं साक्ष्य-आधारित समीक्षा
Keywords:
प्रहर, होरा, ज्योतिष, अल्पकालिक निर्णय, कालजैविकी, मिथ्याकरणीयता, PRISMA-ScRAbstract
पृष्ठभूमि: भारतीय ज्योतिष-परंपरा में दिन को प्रहरों और होराओं में बाँटकर कार्यारंभ के लिए "शुभ" और "अशुभ" काल निर्धारित किए जाते हैं। यह लाखों लोगों के दैनिक और अल्पकालिक निर्णयों को प्रभावित करता है।
उद्देश्य: पत्र तीन प्रश्न पूछता है। (क) प्रहर-होरा प्रणाली का ऐतिहासिक और गणितीय स्वरूप क्या है? (ख) क्या उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य ज्योतिषीय भविष्यवाणी की वैधता का समर्थन करते हैं? (ग) यदि समर्थन नहीं है, तो मनुष्य के अल्पकालिक निर्णयों में समय का वास्तविक प्रभाव किस प्रकार का है?
विधि: PRISMA 2020 और PRISMA-ScR के सिद्धांतों से निर्देशित, 2024 तक के साहित्य की लक्षित समीक्षा। इसमें प्राथमिक संस्कृत स्रोत, दोहरे-अंध (double-blind) परीक्षण, बड़े जनसंख्या-अध्ययन, संज्ञानात्मक पक्षपात-साहित्य और कालजैविकी (chronobiology) के अध्ययन शामिल हैं।
परिणाम: समीक्षित नियंत्रित अध्ययनों में ज्योतिषीय चार्ट के आधार पर व्यक्तित्व या परिणामों की पहचान संयोग-स्तर से बेहतर नहीं पाई गई। इसके विपरीत, दिन के समय का मानव-निर्णय पर प्रभाव, अर्थात कालजैविक लय, थकान और "नई शुरुआत" का मनोविज्ञान, शोध-साहित्य में दर्ज है। इसका ग्रहों से कोई संबंध नहीं है।
निष्कर्ष: प्रहर-होरा प्रणाली का भविष्यसूचक-ज्योतिषीय दावा अनुभवजन्य साक्ष्य से समर्थित नहीं है। फिर भी इसकी समय-संरचना एक अनुशासनात्मक निर्णय-अनुष्ठान (pre-commitment ritual) की तरह उपयोगी हो सकती है। यह एक परिकल्पना है, सिद्ध तथ्य नहीं। पत्र इसके परीक्षण का एक प्रतिकृतिक (falsifiable) प्रोटोकॉल प्रस्तावित करता है।

