वास्तु शास्त्र और निर्माण कार्यों में अग्निवास तथा दिशा शूल विचार का महत्व

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

वास्तु शास्त्र; अग्निवास; दिशा-शूल; मुहूर्त; निर्माण कार्य; जलवायु-अनुकूल डिज़ाइन; भारतीय ज्ञान परंपरा; आलोचनात्मक समीक्षा

Abstract

भारतीय निर्माण-परंपरा में भूमि-चयन से लेकर गृह-प्रवेश तक प्रत्येक चरण को दिशा, काल और देवता के त्रिविध संदर्भ में देखा गया है। इस संदर्भ में दो अवधारणाएँ — होम-यज्ञादि कर्मों से जुड़ा अग्निवास तथा यात्रा-प्रस्थान से जुड़ा दिशा-शूल — आज भी भवन-निर्माण के शुभारंभ, भूमि-पूजन, शिलान्यास तथा गृह-प्रवेश के मुहूर्त-निर्धारण में निर्णायक मानी जाती हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र इन दोनों अवधारणाओं का शास्त्रीय स्रोतों, उपलब्ध आधुनिक शोध-साहित्य तथा गणितीय-जलवायवीय विश्लेषण के आधार पर आलोचनात्मक अध्ययन करता है। अध्ययन PRISMA-ScR की पारदर्शिता-भावना पर आधारित एक विवरणात्मक-विश्लेषणात्मक समीक्षा (scoping-type critical review) है, जिसमें संस्कृत मूल-ग्रंथों, वास्तु-इतिहास, जलवायु-अनुकूल भवन-डिज़ाइन, इनडोर वायु-गुणवत्ता तथा अंधविश्वास के मनोविज्ञान से संबंधित स्रोतों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। मौलिक गणना से यह पाया गया कि अग्निवास के सूत्र के अंतर्गत 210 वार-तिथि संयोगों में से 105 (50.0%) में अग्नि का वास पृथ्वी पर, 53 (25.2%) में आकाश में तथा 52 (24.8%) में पाताल में आता है; अर्थात यह सूत्र लगभग समान-वितरण वाली चक्रीय समय-सारणी रचता है। इसी प्रकार दिशा-शूल का नियम प्रत्येक दिन चार प्रमुख दिशाओं में से ठीक एक दिशा को निषिद्ध करता है, अतः किसी भी यादृच्छिक दिन किसी दी हुई दिशा के निषिद्ध होने की संभावना 25% रहती है। विश्लेषण से निष्कर्ष निकलता है कि वास्तु के दिशा-संबंधी नियमों (जैसे ईशान की खुली-हल्की रचना, आग्नेय में पाकशाला) के पीछे सूर्य-पथ, वायु-प्रवाह तथा अग्नि-सुरक्षा के व्यावहारिक तर्क अंशतः खोजे जा सकते हैं, किंतु अग्निवास तथा दिशा-शूल जैसे ज्योतिषीय-मुहूर्तगत नियमों के भवन की संरचनात्मक गुणवत्ता, सुरक्षा या निवासियों के स्वास्थ्य पर कारणात्मक प्रभाव को सिद्ध करने वाला कोई नियंत्रित अनुभवजन्य प्रमाण उपलब्ध साहित्य में नहीं मिलता। इनकी निरंतरता का अधिक संतोषजनक स्पष्टीकरण सांस्कृतिक-अनुष्ठानिक, मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक कार्य-प्रणालियों में मिलता है। शोध-पत्र शास्त्र-सम्मान तथा वैज्ञानिक-अनुशासन के बीच संतुलित, प्रमाण-आधारित दृष्टि की अनुशंसा करता है।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    Shodh Prakashan, Hisar, Haryana

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Published

2024-02-26

Issue

Section

Articles

How to Cite

वास्तु शास्त्र और निर्माण कार्यों में अग्निवास तथा दिशा शूल विचार का महत्व. (2024). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 1(8), 26-45. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/135

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