जन्मपत्री निर्माण और नक्षत्र-चरण आधारित भविष्यकथन की सटीकता का परीक्षण

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

जन्मपत्री; नक्षत्र-चरण; नवांश; विंशोत्तरी दशा; भविष्यकथन की सटीकता; मिथ्याकरणीयता; PRISMA; मापन-त्रुटि

Abstract

पृष्ठभूमि: भारतीय ज्योतिष-परंपरा में जन्मपत्री (जातक-कुंडली) का निर्माण जन्म-क्षण के गणितीय निर्धारण पर टिका है। इसमें लग्न, चंद्र-नक्षत्र, नक्षत्र-चरण (पाद), नवांश और विंशोत्तरी दशा की गणना होती है। फलकथन की विश्वसनीयता इन्हीं सूक्ष्म विभाजनों पर निर्भर बताई जाती है। इन दावों का परीक्षण दो अलग स्तरों पर होना चाहिए। पहला स्तर गणना की शुद्धता का है, दूसरा फलकथन की अनुभवजन्य सटीकता का।

उद्देश्य: (क) जन्मपत्री-निर्माण की गणितीय संरचना और उसके मापन-बिंदुओं का विश्लेषण करना; (ख) नक्षत्र-चरण आधारित भविष्यकथन की सटीकता पर उपलब्ध नियंत्रित अध्ययनों की संरचित समीक्षा करना; (ग) जन्म-समय की त्रुटि का वर्गीकरण-स्थिरता पर प्रभाव मापना; (घ) परीक्षण का एक पुनरुत्पादनीय प्रोटोकॉल प्रस्तावित करना।

विधि: PRISMA 2020 और PRISMA-ScR की पारदर्शिता-भावना पर आधारित एक प्रयोजनमूलक (purposive) संरचित समीक्षा की गई। इसमें 2024 तक प्रकाशित मुख्य परीक्षण-अध्ययनों का तुलनात्मक विश्लेषण हुआ। साथ ही लगभग चार लाख काल्पनिक जन्मों पर मोंटे-कार्लो अनुकरण चलाया गया, जिसमें अक्षांश 28.6° उत्तर (दिल्ली) लिया गया।

परिणाम: समीक्षित नियंत्रित अध्ययनों में, जहाँ भविष्यवाणी पहले से परिभाषित और जाँचने योग्य थी, ज्योतिषीय पद्धति की सटीकता संयोग-स्तर से सार्थक रूप से ऊपर नहीं मिली। अनुकरण दर्शाता है कि ±15 मिनट की जन्म-समय त्रुटि पर लग्न-नवांश लगभग 54% मामलों में बदल जाता है। चंद्र-चरण लगभग 2% मामलों में बदलता है, और विंशोत्तरी दशा का आरंभ-समय प्रति घंटे की त्रुटि पर लगभग 3 से 10 माह खिसकता है।

निष्कर्ष: नक्षत्र-चरण आधारित फलकथन की सटीकता के पक्ष में अब तक का नियंत्रित साक्ष्य अपर्याप्त है। इसका अर्थ यह नहीं कि परंपरा सांस्कृतिक या मनोवैज्ञानिक कार्य नहीं करती, पर ये कार्य "भविष्यवाणी-सटीकता" से भिन्न हैं। अनुसंधान को पूर्व-पंजीकृत (pre-registered), द्वि-अंध (double-blind) और संभाव्यता-आधारित मूल्यांकन की ओर बढ़ना होगा।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    Shodh Prakashan, Hisar, Haryana

Downloads

Published

2024-01-27

Issue

Section

Articles

How to Cite

जन्मपत्री निर्माण और नक्षत्र-चरण आधारित भविष्यकथन की सटीकता का परीक्षण. (2024). शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN, 1(7), 41-56. https://shodhprakashan.in/index.php/journal/article/view/131

Similar Articles

1-10 of 78

You may also start an advanced similarity search for this article.

Most read articles by the same author(s)

1 2 3 4 5 6 7 > >>