भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का विकास और रोजगार सृजन में इसकी भूमिका
Keywords:
भारत, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), विकास, रोजगार सृजनAbstract
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में आर्थिक विकास का एक सशक्त साधन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) हैं। यह क्षेत्र न केवल औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है, बल्कि व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन का भी प्रमुख स्रोत है। कृषि क्षेत्र के बाद MSME क्षेत्र देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। वर्तमान शोधपत्र का उद्देश्य भारत में MSMEs के विकास की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना तथा यह समझना है कि यह क्षेत्र किस प्रकार से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न कर रहा है। इस शोध में MSME की वर्तमान परिभाषा के साथ उसके तीन वर्गों—सूक्ष्म, लघु और मध्यम—का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत किया गया है। वर्ष 2020 में UDYAM पोर्टल की शुरुआत के बाद से MSMEs के पंजीकरण में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। MSME न केवल देश की आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, बल्कि यह विदेशी मुद्रा अर्जन का भी माध्यम हैं। रोजगार सृजन के दृष्टिकोण से MSME क्षेत्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि यह क्षेत्र कम पूंजी में अधिकतम मानव संसाधनों का उपयोग कर सकता है। MSMEs में करीब 11 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रोजगार मिला है। यह क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन को रोकने, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा स्वरोजगार के अवसर उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से स्वयं सहायता समूह (SHG), कौशल विकास योजनाएँ तथा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसे कार्यक्रम अत्यंत प्रभावशाली रहे हैं। MSME क्षेत्र न केवल भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता को सशक्त बना रहा है, बल्कि यह देश के सामाजिक और रोजगारपरक ढाँचे को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। यदि इसके समक्ष उपस्थित बाधाओं को योजनाबद्ध नीति, वित्तीय समर्थन और तकनीकी नवाचार के माध्यम से दूर किया जाए, तो MSME क्षेत्र भारत को "आत्मनिर्भर भारत" की ओर ले जाने वाला प्रमुख मार्ग बन सकता है।

