समय प्रबंधन और प्राचीन भारतीय मुहूर्त विज्ञान: एक तुलनात्मक अध्ययन
Keywords:
समय प्रबंधन, मुहूर्त विज्ञान, पंचांग, क्रोनोबायोलॉजी, वैदिक ज्योतिष, ब्रह्म मुहूर्त, तुलनात्मक अध्ययनAbstract
आधुनिक प्रबंधन-विज्ञान में "समय प्रबंधन" (Time Management) एक सुस्थापित शास्त्र है, जिसकी नींव पीटर ड्रकर, स्टीफन कोवी और सिरिल पार्किंसन जैसे चिंतकों ने रखी [1-3]। किंतु भारतीय ज्योतिष-परंपरा में काल-विभाजन का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक ढाँचा — मुहूर्त विज्ञान — सहस्राब्दियों पूर्व से विद्यमान रहा है, जिसमें दिन-रात्रि के 24 घंटों को 30 मुहूर्तों (प्रत्येक 48 मिनट) में विभाजित किया गया है [4,5]। प्रस्तुत शोध-पत्र इन दोनों परंपराओं — आधुनिक पाश्चात्य समय-प्रबंधन सिद्धांत तथा प्राचीन वैदिक मुहूर्त-व्यवस्था — का तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन की पद्धति साहित्यिक समीक्षा (Narrative-cum-Scoping Review) है, जिसमें PRISMA-ScR के ढाँचे को वैचारिक साहित्य (classical/conceptual literature) के चयन हेतु अनुकूलित किया गया है [6]। शोध में पाया गया कि यद्यपि मुहूर्त-व्यवस्था का "शुभ-अशुभ" वर्गीकरण ज्योतिषीय/सांस्कृतिक प्रकृति का है और प्रयोगसिद्ध (empirically falsifiable) नहीं है, तथापि इसकी अंतर्निहित चक्रीय संरचना आधुनिक क्रोनोबायोलॉजी (Chronobiology) के सर्कैडियन रिदम (circadian rhythm) सिद्धांतों से उल्लेखनीय समानता रखती है, विशेषतः "ब्रह्म मुहूर्त" एवं जागरण-संबंधी कॉर्टिसॉल-मेलाटोनिन चक्र के मध्य [7,8]। शोध-पत्र में दो तुलनात्मक तालिकाएँ प्रस्तुत की गई हैं तथा निष्कर्षतः यह तर्क दिया गया है कि प्राचीन मुहूर्त-विज्ञान को एक "सांस्कृतिक समय-अनुशासन प्रणाली" (cultural chrono-discipline system) के रूप में देखा जा सकता है, न कि विशुद्ध रूप से आधुनिक अर्थों में वैज्ञानिक समय-प्रबंधन उपकरण के रूप में।

