[1]
2024. पर्यावरण संतुलन और ऋतु परिवर्तन के अध्ययन में पारंपरिक काल-मान पद्धतियों की प्रासंगिकता. शोध प्रकाशन SHODH PRAKASHAN. 2, 4 (Oct. 2024), 69–83.